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Showing posts from December, 2025

सरवभूमि: पिछले जन्म का प्यार

एक कॉलेज स्टूडेंट, नैना, अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ एक कॉलेज ट्रिप पर जाती है। उनका गंतव्य था—एक पुरानी हवेली, जो 100 साल पहले की एक महारानी की थी। हवेली बहुत पुरानी थी और कई सालों से वहाँ कोई सफाई नहीं हुई थी। पूरा जगह धूल-मिट्टी और जाले से भरा हुआ था। सारे स्टूडेंट्स हवेली को एक्सप्लोर करते हैं—पेंटिंग्स, किताबें, फर्नीचर और कमरे। नैना भी उनके साथ घूमती है। वहाँ एक आदमी सभी को हवेली और महारानी सर्वभूमि की कहानी सुनाता है। नैना घूमते हुए महारानी की एक बड़ी तस्वीर के पास पहुँचती है। तस्वीर के नीचे लिखा था—सर्वभूमि। नैना जब उस तस्वीर को देखती है, उसे कुछ अजीब सा लगता है, जैसे उसने यह लड़की कहीं देखी है। फिर उसकी नजर वहाँ पड़ी एक सुंदर डायरी पर। डायरी का कवर चमकदार पत्थरों से सजा था और उस पर छोटा सा लॉक भी था। नैना डायरी खोलती है और पहले पन्ने पर बस लिखा था—सर्वभूमि। नैना को हमेशा से डायरी लिखने का शौक था। वह अपने अच्छे पल और सपने डायरी में लिखती थी, जिन्हें वह किसी से साझा नहीं करती थी। नैना सोचती है कि यह धूल भरी डायरी किसके काम की होगी, और वह इसे अपने साथ ले जाती है। हवेली की खोज पू...

माँ के आँसु बने बेटी की ताकत

डायरी जो माँ की अधूरी कहानी को पूरा करती है।  वह लड़की हमेशा मुस्कुराने वाली, चहकती हुई सी थी। उसके सारे सपने पूरे होते जा रहे थे। उस लड़की का नाम था पायल। वह शुरू से ही अपनी माँ रमा के बहुत क़रीब रही थी। अपनी माँ से प्यारी–प्यारी बातें करना, उनके साथ समय बिताना, जगह-जगह घूमने जाना — ये सब उसे बेहद पसंद था। रमा का स्वभाव बहुत शांत और स्नेही था। पायल ने उन्हें हमेशा एक संयमित और स्नेहिल माँ के रूप में देखा। रमा कभी पायल को किसी काम के लिए मना नहीं करती थीं, और पायल भी हमेशा ऐसा ही व्यवहार करती थी जिससे माँ को कभी दुख न पहुँचे। रमा एक गृहिणी थीं। हर सुबह वे घर के काम निपटाकर अपनी बेटी के लिए नाश्ता बनातीं, और जब पायल कॉलेज जाती तो उसके गालों पर प्यार से किस करती और कहती — “अपना ध्यान रखना, माँ।” पायल मुस्कुराकर कॉलेज चली जाती। फिर रमा घर के सारे काम निपटाने के बाद अपनी डायरी निकालतीं। बिस्तर पर बैठकर बड़े ध्यान से, धीरे–धीरे कुछ लिखा करतीं। ऐसा लगता जैसे वे लिखते समय किसी गहरी सोच में खो जाती हैं। उनकी आँखें भीगी रहतीं — जैसे वे अपने दिल का सारा दर्द उन्हीं पन्नों पर उतार रही हों। दर...